देश की पहली महिला ग्रेजुएट बिहार की बेटी थी. पढाई के लिए लड़ना पड़ा था समाज से
अगर कोई पूछे की देश की पहली महिला डॉक्टर कौन थी, तो आप शायद ही बता पायें. कहा की थी ये गूगल कर के भी नहीं पता लगया जा सकता, इसलिए आज आपको Yesimbihari.in एक ऐसे बिहारी महिला की कहानी बताने जा रहा है, जिसने समाज और देश में बिहार का नाम रौशन करने के साथ साथ. देश की बेटियों के लिए एक उदहारण भी बनी.
कादम्बिनी पहली दक्षिण एशियाई महिला थी, जिन्होंने यूरोपीयन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था. यही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी उन्हें प्राप्त है. 1886 में कादम्बिनी देश की पहली महिला डॉक्टर बनीं थीं. हालांकि, उसी साल महाराष्ट्र की आनंदी बाई जोशी भी महिला डॉक्टर बनने में कामयाब हुई थीं. लेकिन, कादम्बिनी का रिकॉर्ड ये है कि उन्होंने विदेश से डिग्री लेकर एक विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में अपना स्थान बनाया था.
कादम्बिनी इंडिया में ग्रेजुएट होने वाली पहली औरत थीं. वे उस दौर की महिला हैं, जब समाज लड़कियों की शिक्षा के लिए राजी नहीं था. बहुत अड़ंगे लगाता था, लेकिन कादम्बिनी एक शुरुआत थीं. वो न होतीं, तो शायद हमारा समाज और देर से जागता. कादम्बिनी के पिता बृजकिशोर बसु ब्रह्मो सुधारक थे. भागलपुर में हेडमास्टर की नौकरी करने वाले बृजकिशोर ने 1863 में भागलपुर महिला समिति बनाई थी, जो भारत का पहला महिला संगठन था. 1878 में कादम्बिनी कलकत्ता यूनिवर्सिटी का एंट्रेस एग्जाम पास करने वाली पहली लड़की बन गई थीं. उनके इस सफर में देश की पहली महिला ग्रेजुएट होने का कीर्तिमान भी शामिल है.
कादम्बिनी गांगुली
कादम्बिनी गांगुली का जन्म- 18 जुलाई, 1861, भागलपुर, बिहार में हुआ था। भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन थीं। यही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी कादम्बिनी गांगुली को ही प्राप्त है। कादम्बिनी गांगुली पहली दक्षिण एशियाई महिला थीं,
लेखक,- संजीत कुमार भारती


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