Tuesday, 24 October 2017

दिल्ली सरकार ने छठ पूजा पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की
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दिल्ली सरकार ने कहा कि सभी घाटों पर तैयारियों की जांच के लिए एक योजना बनाई गई है. (FILE)
राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली सरकार के कार्यालय 26 अक्तूबर को बंद रहेंगे. आप सरकार ने पिछले साल भी इस मौके पर अवकाश की घोषणा की थी.

नई दिल्ली : उपराज्यपाल अनिल बैजल ने छठ पूजा के मौके पर 26 अक्तूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. नाम नहीं उजागर करने के अनुरोध के साथ अधिकारी ने कहा कि उपराज्यपाल ने छठ पूजा के मौके पर 26 अक्तूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है


राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली सरकार के कार्यालय 26 अक्तूबर को बंद रहेंगे. आप सरकार ने पिछले साल भी इस मौके पर अवकाश की घोषणा की थी. इस बीच चार दिवसीय पूजा की शुरूआत होने के साथ दिल्ली सरकार ने कहा कि सभी घाटों पर तैयारियों की जांच के लिए एक योजना बनाई गई है.

Saturday, 2 September 2017



देश की पहली महिला ग्रेजुएट बिहार की बेटी थी. पढाई के लिए लड़ना पड़ा था समाज से










अगर कोई पूछे की देश की पहली महिला डॉक्टर कौन थी, तो आप शायद ही बता पायें. कहा की थी ये गूगल कर के भी नहीं पता लगया जा सकता, इसलिए आज आपको Yesimbihari.in एक ऐसे बिहारी महिला की कहानी बताने जा रहा है, जिसने समाज और देश में बिहार का नाम रौशन करने के साथ साथ. देश की बेटियों के लिए एक उदहारण भी बनी.
कादम्बिनी पहली दक्षिण एशियाई महिला थी, जिन्होंने यूरोपीयन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था. यही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी उन्हें प्राप्त है. 1886 में कादम्बिनी देश की पहली महिला डॉक्टर बनीं थीं. हालांकि, उसी साल महाराष्ट्र की आनंदी बाई जोशी भी महिला डॉक्टर बनने में कामयाब हुई थीं. लेकिन, कादम्बिनी का रिकॉर्ड ये है कि उन्होंने विदेश से डिग्री लेकर एक विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में अपना स्थान बनाया था.

कादम्बिनी इंडिया में ग्रेजुएट होने वाली पहली औरत थीं. वे उस दौर की महिला हैं, जब समाज लड़कियों की शिक्षा के लिए राजी नहीं था. बहुत अड़ंगे लगाता था, लेकिन कादम्बिनी एक शुरुआत थीं. वो न होतीं, तो शायद हमारा समाज और देर से जागता. कादम्बिनी के पिता बृजकिशोर बसु ब्रह्मो सुधारक थे. भागलपुर में हेडमास्टर की नौकरी करने वाले बृजकिशोर ने 1863 में भागलपुर महिला समिति बनाई थी, जो भारत का पहला महिला संगठन था. 1878 में कादम्बिनी कलकत्ता यूनिवर्सिटी का एंट्रेस एग्जाम पास करने वाली पहली लड़की बन गई थीं. उनके इस सफर में देश की पहली महिला ग्रेजुएट होने का कीर्तिमान भी शामिल है.
कादम्बिनी गांगुली
कादम्बिनी गांगुली का जन्म- 18 जुलाई, 1861, भागलपुर, बिहार में हुआ था। भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन थीं। यही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी कादम्बिनी गांगुली को ही प्राप्त है। कादम्बिनी गांगुली पहली दक्षिण एशियाई महिला थीं, 
लेखक,- संजीत कुमार भारती

Friday, 25 August 2017

Writer Sanjeet Kumar Bharti

                      Bihar Flood:    
नितीश ने बाढ़ग्रस्त अररियाकिशनगंज और 
कटिहार जिले  का जायजा लिया 


पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को बाढ़ प्रभावितअररियाकिशनगंज और कटिहार जिले का दौरा किया तथा वहां बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे राहत कार्यो का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता की खुद जांच की तथा अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री बुधवार कोपूर्णिया से अररिया पहुंचे तथा वहां अररिया कलेज पहुंचकर पार्टी के स्थानीय नेताओं से बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद वे मार्केटिंग यार्ड के उस गोदाम में भी पहुंचे जहां पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की पैकिंग की जा रही थी। इस दौरान नीतीश ने पूरे कार्यो का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। नीतीश ने यहां कई सामानों की गुणवत्ता की भी जांच की। 
मुख्यमंत्री यहां से रानीगंज के एक स्कूल में चलाए जा रहे राहत कार्यो को भी देखने पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ पीड़ितों को अपने हाथों से राहत सामग्री भी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री कटिहार और किशनगंज के लिए निकल गए। नीतीश मंगलवार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। बाढ़ में सबसे ज्यादा 80 लोगों की मौत अररिया जिले में ही हुई है। मुख्यमंत्री इसके बाद किशनगंज पहुंचे। मुख्यमंत्री किशनगंज प्रखंड के चकला पंचायत स्थित मिलिया इंजीनियरिंग कलेज परिसर में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच सामग्री वितरण का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान सभी संबंधित पदाधिकारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।


अमरपाली दुबे भोजपुरी फिल्म की दुनिया मैं सुपर हिट एक्ट्रेस के रूप में उभर रही हैं

क्या आपको पता है कि भोजपुरी फिल्मों में अधिकतर हीरोइन बिहारसे नहीं है यहां तक कि उनको भोजपुरी तक भी नहीं आती वह भोजपुरी को ऐसे बोलती हैं उनका जन्म स्थान बिहार में ही हो
आज हम आपको ऐसे अभिनेत्रियों के बारे में बताएंगे जो करते हैंलेकिन भोजपुरी के भाषा को नहीं जानते हैं.
1. अमरपाली दुबे


अमरपाली दुबे भोजपुरी फिल्म की दुनिया मैं सुपर हिट एक्ट्रेस के रूप में उभर रही हैं
लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अमरपाली दुबे को भोजपुरी भाषाबोलने नहीं आती लेकिन फिल्म में शब्दों का इस्तेमाल करती हैं कि कोई उनको कह नहीं सकता कि वह भोजपुरी बोलने वाली नहीं है.मुंबई महाराष्ट्र में 11 जनवरी 1987 को हुआ था, लेकिन हमें सूत्रों के अनुसार यह पता चला है के माता-पिता गोरखपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. 

📝
✏लेखक संजीत कुमार भारती

Saturday, 19 August 2017


                     SanjeetNews

RBI लायेगी 50 रुपये के नये नोट, चलता रहेगा पुराना नोट

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही 50 रुपये के नए नोट जारी करने जा रहा है। इस नोट के पिछले हिस्से पर रथ के साथ हम्पी की आकृति होगी, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगी।


इस नोट पर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के दस्तखत होंगे। RBI इस नोट के जारी होने के साथ ही 50 रुपये के पुराने नोटों का प्रचलन भी जारी रखेगा। Fluorescent Blue कलर के नए नोट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर है और इसका साइज पुराने 50 के नोट के जितना है।

इस नोट सामने के हिस्से में रोमन लिपि के साथ ही देवनागरी में भी 50 लिखा होगा। बीच में महात्मा गांधी की तस्वीर होगी। महीन अक्षरों में RBI, भारत, INDIA और 50 लिखा होगा। सुरक्षा धागे पर RBI और भारत लिखा होगा।


दाहिने हिस्से पर अशोक स्तंभ होगा। नोट के पिछले हिस्से हिस्से पर बाएं भाग में प्रिंटिंग वर्ष अंकित होगा। इसके साथ ही स्वच्छ भारत का लोगो और नारा भी इस नोट पर अंकित होगा। रथ के साथ हम्पी की तस्वीर होगी।

Sanjeet Kr Bharti 
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Sunday, 13 August 2017


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शराबबंदी के बाद तम्बाकु भी प्रतिबंध लगे बिहार में- शत्रुघ्न सिन्हा
भाजपा के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने शराबबंदी के साथ ही लोगों को कैंसर जैसे घातक रोग से बचाने के वास्ते तम्बाकु सेवन पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की.

किशनगंज: भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय स्वास्थ मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा ने शराबबंदी के साथ ही लोगों को कैंसर जैसे घातक रोग से बचाने के वास्ते तम्बाकु सेवन पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की जिसके बारे में एक अध्ययन में कहा गया है कि यह 2020 तक विश्व में सबसे बड़ा मौत का कारण होगा. शत्रुघ्न ने यह बात बिहार के किशनगंज जिले में कैंसर जागरुकता, जांच और सलाह केंद्र की स्थापना करते हुए कही.

शत्रुघ्न ने कहा कि बिहार में शराबबंदी की प्रशंसा हुई लेकिन यदि यहां इस बंदी का विस्तार करते हुए तम्बाकु के सेवन पर रोक लगा दी जाए तो घातक बीमारी कैंसर से बचाव के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभावकारी असर पडे़गा.

पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न ने तम्बाकु उत्पादों यानि सिगरेट, खैनी और गुटका के बुरे प्रभाव की चर्चा की. उन्होंने ने कहा कि वह पटना साहिब संसदीय क्षेत्र के बख्तियारपुर और दनियावं में आने वाले समय में कैंसर का ऐसा ही केंद्र खोलने की दिशा में काम करेंगे.

Friday, 11 August 2017


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भारत का स्वतंत्रता दिवस - 15 अगस्त 2017


भारतीय स्वतंत्रता दिवस
प्रत्येक वर्ष भारत में 15 अगस्त को स्वन्त्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है। भारत के लोगों के लिये ये दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। वर्षों की गुलामी के बाद ब्रिटिश शासन से इसी दिन भारत को आजादी मिली। 15 अग्स्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से देश की स्वतंत्रता को सम्मान देने के लिये पूरे भारत में राष्ट्रीय और राजपत्रित अवकाश के रुप में इस दिन को घोषित किया गया है।
हालाँकि अंग्रेजों से आजादी पाना भारत के लिये आसान नहीं था; लेकिन कई महान लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे सच कर दिखाया। अपने सुख, आराम और आजादी की चिंता किये बगैर उन्होंने अपने भावी पीढ़ी की आजादी के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया। पूर्ण स्वराज प्राप्त करने के लिये हिंसात्मक और अहिंसात्मक सहित इन्होंने कई सारे स्वतंत्रता आंदोलन को आयोजित किये तथा उस पर कार्य किया। आजादी के बाद भारत से पाकिस्तान अलग बँट गया जो कि हिंसात्मक दंगों को भी साथ लाया। अपने घरों से लोगों का विस्थापन (15 लाख लोगों से अधिक) और बड़ी संख्या में जनहानि का कारण ये डरावना दंगा था।

इस दिन पर, सभी राष्ट्रीय, राज्य तथा स्थानीय सरकार के कार्यालय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, बाजार, दुकानें, व्यापार, संस्थान आदि बंद रहते है। हालाँकि, सार्वजनिक परिवहन बिल्कुल प्रभावित नहीं होता है। इसे बहुत उत्साह के साथ भारत की राजधानी दिल्ली में मनाया जाता है जबकि स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक समुदाय तथा समाज सहित दूसरे शिक्षण संस्थानों में भी मनाया जाता है।
15 अगस्त 2017 (इंडिपेंडेंस डे)

मंगलवार, 15 अगस्त 2017 को पूरे भारत के लोगों द्वारा भारत के स्वतंत्रता दिवस को मनाया जायेगा। इस साल 2017 में भारत अपना 71वाँ स्वतंत्रता दिवस मनायेगा। 15 अगस्त 1947 को भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।

भारत की 71वें स्वतंत्रता दिवस 2017 पर विशेष क्या है

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,
      👉लाल किले में स्वतंत्रता दिवस समारोह की घटना मुक्त            उत्सव सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस कड़ी                मेहनत कर रही है। यह पहली बार है जब लाल किले              में 300 कैमरा (नाईट विज़न के साथ, 360 डिग्री व्यू)            हर जगह निगरानी के लिए लगाए गए है।
      👉प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता,                आतंकवाद, जातिवाद, गरीबी, साथ ही साथ गंदगी                जैसी समस्याओं को देश से 2022 तक हमेशा के                  लिए बाहर निकालने के लिए देशवासियों को                        प्रोत्साहित किया और भारत छोड़ो आंदोलन का फिर            से (महात्मा गांधी के बाद) आह्वान किया। उन्होंने                  लोगों से अनुरोध किया कि वे इन बुराइयों को देश से              जड़ से फेंकने और एक "नया भारत" बनाने के प्रति              वचनबद्ध हों।
No
भारत के स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

17वीँ शताब्दी के दौरान कुछ यूरोपियन व्यापारियों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर प्रवेश किया गया। अपने विशाल सैनिक शक्ति की वजह से ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत को गुलाम बना लिया गया। 18 शताब्दी के दौरान पूरे भारत में अंग्रेजों ने अपना स्थानीय साम्राज्य और असरदार ताकत स्थापित कर लिया था। 1857 में ब्रिटीश शासन के खिलाफ भारत के लोगों द्वारा एक बहुत बड़े स्वतंत्रता क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी। उस गदर को महान गदर कहा जाता है, 1857 का विद्रोह, भारतीय बगावत, 1857 का पठान और सिपाहीयों का विद्रोह। 10 मई 1857 में बंगाल प्रांत में ब्रिटीश ईस्ट इंडिया कंपनी आर्मी के खिलाफ इसकी शुरुआत हो गई। उस विद्रोह के द्वारा (1858 का अधिनियम भारत सरकार), भारत को नियंत्रण मुक्त करने का एहसास ब्रिटीश राज को भारतीय स्वतंत्रता सेनानीयों ने दिलाया।

1857 की बगावत एक असरदार विद्रोह था जिसके बाद पूरे भारत से कई सारे नगरीय समाज उभरे। उनमें से एक भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी थी जिसका निर्माण वर्ष 1885 हुआ। पूरे राष्ट्र में असंतोष और उदासी के काल ने अहिंसात्मक आंदोलनों (असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन) को बढ़ावा दिया जिसका नेतृत्व गाँधी जी ने किया।

लाहौर में 1929 में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस अधिवेशन में, भारत ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की। इसके पहले, 1930 से 1947 के बीच भारतीय स्वतंत्रता दिवस के रुप में 26 जनवरी को घोषित किया गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिये भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस द्वारा भारतीय नागरिकों से निवेदन किया गया था साथ ही साथ भारत के पूर्ण स्वतंत्रता तक आदेशों का पालन समय से करने के लिये भी कहा गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में ब्रिटिश सरकार आश्वस्त हो चुकी थी कि वो लंबे समय तक भारत को अपनी शक्ति नहीं दिखा सकती। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लगातार लड़ रहे थे और तब अंग्रेजों ने भारत को मुक्त करने का फैसला किया हालाँकि भारत की आजादी (15 अगस्त 1947) के बाद हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए जिसने भारत और पाकिस्तान को अलग कर दिया। मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल बने जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरु आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री। दिल्ली, देश की राजधानी में एक आधिकारिक समारोह रखा गया जहाँ सभी बड़े नेता और स्वतंत्रता सेनानियों (अबुल कलाम आजद, बी.आर.अंबेडकर, मास्टर तारा सिंह, आदि) ने इसमें भाग लेकर आजादी का पर्व मनाया।

बँटवारे की हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में दोनों तरफ से लोग मरे जबकि दूसरे क्षेत्र के लोगों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया था। संवैधानिक हॉल, नई दिल्ली में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में 14 अगस्त को 11 बजे रात को संवैधानिक सभा की 5वीं मीटींग रखी गई थी जहाँ जवाहर लाल नेहरु ने अपना भाषण दिया था।

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्री, जवाहर लाल नेहरु ने भारत को स्वतंत्र देश घोषित किया जहाँ उन्होंने “ट्रीस्ट ओवर डेस्टिनी” भाषण दिया था। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि “बहुत साल पहले हमने भाग्यवधु से प्रतिज्ञा की थी और अब समय आ गया है जब हम अपने वादे को पूरा करेंगे, ना ही पूर्णतया या पूरी मात्रा में बल्कि बहुत मजबूती से। मध्यरात्री घंटे के स्पर्श पर जब दुनिया सोती है, भारत जीवन और आजादी के लिये जागेगा। एक पल आयेगा, जो आयेगा, लेकिन इतिहास में कभी कभार, जब हम पुराने से नए की ओर बढ़ते है, जब उम्र खत्म हो जाती है और राष्ट्र की आत्मा जो लंबे समय से दवायी गयी थी उसको अभिव्यक्ति मिल गयी है। आज हमने अपने दुर्भाग्य को समाप्त कर दिया और और भारत ने खुद को फिर से खोजा”।

इसके बाद, असेंबली सदस्यों ने पूरी निष्ठा से देश को अपनी सेवाएँ देने के लिये कसम खायी। भारतीय महिलाओं के समूह द्वारा असेंबली को आधिकारिक रुप से राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया था। अतत: भारत आधिकारिक रुप से स्वतंत्र देश हो गया, और नेहरु तथा वाइसराय लार्ड माउंटबेटन, क्रमश: प्रधानमंत्री और गवर्नर जनरल बने। महात्मा गाँधी इस उत्सव में शामिल नहीं थे। वो कलकत्ता में रुके थे और हिन्दु तथा मुस्लिम के बीच शांति को बढ़ावा देने केलिये 24 घंटे का व्रत रखा था।

स्वतंत्रता दिवस उत्सव

भारत के राष्ट्रीय अवकाश के रुप में पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस को मनाया जाता है। इसे हर साल प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में पूरे उत्सुकता से देखा जाता है। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले की शाम को “राष्ट्र के नाम संबोधन” में हर साल भारत के राष्ट्रपति भाषण देते है। 15 अगस्त को देश की राजधानी में पूरे जुनून के साथ इसे मनाया जाता है जहाँ दिल्ली के लाल किले पर भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराते है। ध्वजारोहण के बाद, राष्ट्रगान होता है, 21 तोपों की सलामी दी जाती है तथा तिरंगे और महान पर्व को सम्मान दिया जाता है।

स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओँ जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी को श्रद्धांजलि देने के बाद, स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण के दौरान भारत के प्रधानमंत्री पिछले साल की उपलब्धियों, महत्पूर्ण सामाजिक मुद्दे और उनके हल, देश के आगे का विकास, शिक्षा आदि को रेखांकित करते है। पैरामिलीट्री फोर्सेस और भारतीय सैनिकों द्वारा भव्य मार्च पास्ट किया जाता है। विभिन्न सांस्कृतिक परंपरा के अलग-अलग राज्य में स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया जाता है जहाँ हर राज्य का मुख्यमंत्री राष्ट्रीय झंडे को फहराता है जोकि प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक क्रिया-कलापों द्वारा लहराया जाता है।

ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, परेड समारोह, दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित लगभग सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान, शिक्षण संस्थान, कुछ निजी संस्थान आदि पूरे देश में होता है। स्कूल तथा कॉलेजों में प्रधानाचार्य द्वारा झंडा फहराया जाता है और फिर वहाँ के विद्यार्थियों द्वारा परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाता है। इस दिन पर, सरकारी कार्यालय, बिल्डिंग आदि को रोशनी, फूलों और दूसरे सजावटी समानों से सजाया जाता है। अलग अलग लंबाई के झंडे के द्वारा लोग देश के प्रति अपने समर्पण और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते है।

स्वतंत्रता दिवस को मनाने के दौरान आतंकवादी हमलों का बड़ा खतरा रहता है खासतौर से दिल्ली, मुम्बई तथा जम्मु-कश्मीर जैसे बड़े शहरों में। इसी वजह से इस अवसर पर हवाई हमलों से बचने के लिये लाल किले के आस-पास के क्षेत्र को “नो फ्लाई जोन” घोषित कर दिया जाता है। सुरक्षा कारणों से पूरे शहर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाती है। पूरे देश के लोगों के लिये इस कार्यक्रम का टेलीविजन पर सजीव प्रसारण किया जाता है।

इस अवसर को लोग अपने दोस्त, परिवार, और पङोसियों के साथ फिल्म देखकर, पिकनिक मनाकर, समाजिक कार्यक्रमों में भाग लेकर मनाते है। इस दिन पर बच्चे अपने हाथ में तिरंगा लेकर ‘जय जवान जय जय किसान’ और दूसरे प्रसिद्ध नारे लगाते है।

भारत में स्वतंत्रता दिवस का महत्व और प्रतीक

स्वतंत्रता दिवस प्रतीक है भारत में पतंग उड़ाने के खेल का। अनगिनत विभिन्न आकार, प्रकार और स्टाईल के पतंगों से भारतीय आकाश पट जाता है। इनमें से कुछ तिरंगे के तीन रंगो में भी होता है जो राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित करता है। स्वतंत्रता दिवस का दूसरा प्रतीक नई दिल्ली का लाल किला है जहाँ 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था।

1947 में ब्रिटीश शासन से भारत की आजदी को याद करने के लिये हम स्वतंत्रता दिवस को मनाते है। 15 अगस्त भारत के पुनर्जन्म जैसा है। ये वो दिन है जब अंग्रेजों ने भारत को छोड़ दिया और इसकी बागडोर हिन्दूस्तानी नेताओं के हाथ में आयी। ये भारतियों के लिये बेहद महत्वपूर्ण दिन है और भारत के लोग इसे हर साल पूरे उत्साह के साथ मनाते है।

Sunday, 6 August 2017


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रक्षाबंधन: जानें कितने बजे तक बंधेगी राखी, कब से रहेगा ग्रहण
जानें कितने बजे तक बंधेगी राखी

श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का उदाहरण है। इस बार रक्षाबंधन 7 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रग्रहण पड़ रहा है। हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि ग्रहण काल के दौरान भगवान की आराधना नहीं करनी चाहिए। वहीं इस दौरान कोई शुभ काम नहीं किया जाता। ऐसा माना जाता है कि चंद्रग्रहण कुंवारों के लिए अच्छा नहीं होता है क्योंकि सुंदरता का प्रतीक चंद्रमा तो श्रापित है और जो भी कुंवारा लड़का या लड़की उसे देखता है तो उसकी शादी या तो रूक जाती है या बहुत मुश्किलों से तय होती है। कहा जाता है कि इस दौरान किए गए काम से इंसान का नुकसान और अहित ही होता है इसलिए चंद्रग्रहण से पहले और ग्रहण तक हर अच्छे काम नहीं करने चाहिए।
अगली स्लाइड में जानें राखी बांधने का समय

इस समय बांधे राखी

इस समय बांधे राखी
इस बार 7 अगस्त सोमवार रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इस ग्रहण का सूतक काल रक्षाबंधन के दिन दोपहर 1 बजकर 52 मिन्ट से ही शुरू हो जायेगा और ग्रहण के सूतक शुरू होने से ग्रहण मोक्ष होने तक के समय को शुभ मंगल कार्यों और सांसारिक कार्यों के लिए त्याज्य माना गया है।
इसके अलावा रक्षाबंधन वाले दिन सुबह 11:05 बजे तक भद्रा भी उपस्थित रहेगी और शास्त्रोक्त दृष्टि से भद्रा काल को शुभ मंगल कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना गया है। इसलिए सुबह 11 बजकर 5 मिन्ट पर भद्रा समाप्त होने पर ही राखी बांधना शुभ होगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा और ग्रहण के सूतक काल को देखते हुए राखी बांधने के लिए सुबह 11 बजकर 5 मिन्ट से लेकर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक का समय ही विशेष शुभ और मंगल दायक होगा।

चंद्रग्रहण क्यों होता है अशुभ, जानें इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्यएवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनानेसे पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Wednesday, 26 July 2017

नीतीश को समर्थन दे सकती है बीजेपी, जानिए क्या है बहुमत का गणितBreaking news Nitish conveyed the resignation of the voice of the individual, PM Modi congratulated
Breaking news
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपने पद से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली में संसदीय बोर्ड की बैठक होने वाली है. समझा जाता है कि संसदीय बोर्ड की बैठक में जद-यू को समर्थन देने के बारे में फैसला हो सकता है. नीतीश कुमार ने बुधवार शाम साढ़े छह बजे राजभवन में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मिलकर इस्तीफा दे दिया.

नई दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपने पद से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली में संसदीय बोर्ड की बैठक होने वाली है. समझा जाता है कि संसदीय बोर्ड की बैठक में जद-यू को समर्थन देने के बारे में फैसला हो सकता है. नीतीश कुमार ने बुधवार शाम साढ़े छह बजे राजभवन में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मिलकर इस्तीफा दे दिया.

नीतीश कुमार बुधवार को जद-यू विधायक दल की बैठक के बाद राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मिलने पहुंचे. इस मुलाकात को लेकर मीडिया में नीतीश के इस्तीफे की अटकलें लगने लगीं जो बाद में सही साबित हुईं. उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की बेनामी संपत्ति मामले में जद-यू और राजद के बीच बनी तकरार नीतीश के इस्तीफे के रूप में सामने आई.

और पढ़ें : नीतीश कुमार ने छोड़ा लालू का साथ, फिर जाएंगे भाजपा के साथ!

सरकार बनाने के लिए चाहिए 122 विधायकों का  समर्थन


243 सीटों वाली बिहार की विधानसभा में लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल को 80 सीटें मिलीं जबकि जनता दल यूनाइटेड को 71 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी को 53 सीटें मिलीं. बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 122 सीटों का है. 

लालू यादव के पास आंकड़े नहीं

अब राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के सामने नई सरकार के गठन की चुनौती है. परंपरा के अनुसार उन्हें विधानसभा में सबसे बड़े दल राष्ट्रीय जनता दल को सरकार बनाने को बुलाना चाहिए लेकिन राज्यपाल इससे पहले आरजेडी से उसके समर्थक विधायकों की लिस्ट मांग सकते हैं. आंकड़े साफ हैं कि लालू की पार्टी के पास सरकार बनाने लायक विधायक नहीं हैं. उनके पास खुद की 80 सीटें हैं जबकि कांग्रेस के 27 व अन्य एक-दो सीटें मिलाकर वे 122 के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच सकते. 

बिहार में सरकार बनाने के लिए नीतीश कुमार को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए. महागठबंधन से राजद और कांग्रेस के हटने के बाद नीतीश के पास 71 विधायकों का समर्थन रह जाएगा. भाजपा के पास 53 विधायक, लोजपा के 2 और आरएलएसपी के 2 विधायकों को मिलाने पर विधायकों की संख्या 128 हो जाती है जो बहुमत से ज्यादा है. 

पिछले कुछ समय से जद-यू और भाजपा के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन देकर नीतीश ने भाजपा के साथ जाने का एक तरह से संकेत पहले ही दे दिया था. 


नीतीश ने इस्तीफे को बताया अंतरआत्मा की आवाज, पीएम मोदी ने दी बधाई
नई दिल्ली: बिहार में राजनीतिक हलचल के बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने आज राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात की. नीतीश कुमार ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया है. आज जेडीयू विधायक दल की बैठक हुई. जानकारी के मुताबिक इसी बैठक में नीतीश कुमार ने इस्तीफे का फैसला लिया है.
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नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को बधाई दी है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ”भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई. सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं. देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक होकर लड़ना,आज देश और समय की मांग है.”

इस्तीफा देने के बाद बीजेपी के साथ सरकार बनाने को लेकर नीतीश कुमार ने कहा, ”जो होना थो वो हो गया, आगे क्या होगा इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है. बिहार के हित के लिए जो भी संभव होगा वो कदम उठाया जाएगा. इस्तीफा देने से पहले हमने लालू यादव, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और अपनी पार्टी के विधानमंडल दल के सदस्यों को भी जानकारी दी.”
नीतीश कुमार ने कहा, ”मैं हमेशा विपक्षी एकता के पक्षधर रहे हैं लेकिन इसके लिए कोई एजेंडा तो होना चाहिए. इसके साथ ही अगर किसी मुद्दे पर हमें स्टैंड लेना हो चाहे नोटबंदी का मामला हो या राष्ट्रपति चुनाव तो इसकी आजादी तो होनी चाहिए. जिस बिहार में काम कर रहे हैं उसमें ऐसी स्थिति बन जाए जिसमें काम के बजाए कुछ और चर्चा हो रही तो अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर तय किया कि ऐसी सरकार चलाना संभव नहीं है. हम विवाद की राजनीति नहीं करते इसलिए किसी को बर्खास्त नहीं किया.”
नीतीश कुमार ने कहा, “हमने नोटबंदी का समर्थन किया तो मेरे ऊपर पता नहीं कैसे कैसे आरोप लगे. लेकिन साथ ही हमने कहा कि बेनामी संपत्ति पर हमला कीजिए. मैं हमेशा कहता रहा हूं कि अवैध तरीके से हासिल की गई संपत्ति के खिलाफ रहा हूं.”
नीतीश कुमार ने कहा, “मैंने राहुल जी से मुलाकात की, उनको अध्यादेश फाड़े जाने की बात की. हमने बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष से भी बात की लेकिन कुछ भी हल नहीं निकला. लालू जी से मेरी बात हो रही थी, हमने उनसे आरोपों पर सफाई देने को कहा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. सरकार के अंदर के किसी व्यक्ति पर कोई आरोप लगे और हम कोई जवाब देने की स्थिति में ना हों तो फिर सरकार चलाना मेरे स्वाभाव के हिसाब से संभव नहीं है.”
नीतीश कुमार ने कहा, ”हमने अपने स्तर पर पूरी कोशिश की. हमने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा. लालू जी और तेजस्वी यादव से मांग की जो भी आरोप लग रहे हैं उन पर सफाई दीजिए. मैंने ये बात कही थी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. ऐसी परिस्थिति बन गयी कि काम करना मुश्किल हो गया. कई बार सोचने के बाद मेरा फैसला मेरे अंतर आत्मा की आवाज है.”
राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद नीतीश कुमार ने कहा, ”हमने महागठबंधन की सरकार को 20 महीने से ज्यादा चलाया है. जितना संभव हुआ गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बिहार की जनता से चुनाव के दौरान जो बातें की उसी के मुताबिक काम करने की कोशिश की. इस माहौल में काम करना संभव नहीं था.”
बिहार में बीजेपी विधायक दल की बैठक दल की बैठक शुरू.
दिल्ली में आज शाम सात बजे बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होनी है. जानकारी के मुताबिक इस बैठक में बिहार में आगे की राजनीति को लेकर चर्चा हो सकती है.
तेजस्वी और लालू ने कहा था कि इस्तीफे नहीं देगे
आज आरजेडी विधायक दल की बैठक के बाद लालू यादव और तेजस्वी यादव ने साफ किया था वो किसी भी सूरत में इस्तीफा नहीं देंगे. एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था कि जब नीतीश कुमार ने मेरा इस्तीफा मांगा ही नहीं तो फिर इस्तीफे का सवाल ही नहीं होता. महागठबंधन को परेशान करने के लिए मुझे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है. ये लोग जिंदगी भर हमारे नाती-पोतों पर भी आरोप लगाते रहेंगे.
तेजस्वी को बर्खास्त करने दबाव था
आपको बता दें कि बिहार में लालू यादव के घर पर सीबीआई के छापों रेलवे टेंडर घोटाले में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का नाम आने के बाद नीतीश पर तेजस्वी यादव के इस्तीफे का दवाब बन रहा था. इसी पूरी सरगर्मी के बीच नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा देने का फैसला लिया है.
बीजेपी बाहर से समर्थन देने को तैयार
आपको बता दें कुछ दिन पहले ही बिहार बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय ने बड़ा बयान दिया था. नित्यानंद राय ने कहा था कि अगर नीतीश कुमार तेजस्वी को बर्खास्त करते हैं और इससे सरकार पर संकट आता है तो बीजेपी नीतीश को बाहर से समर्थन देगी.
बिहार में सरकार का समीकरण क्या है?
बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं. जबकि सरकार बनाने के लिए 122 सीटें चाहिए. बिहार में जेडीयू, आरजेडी औ

Friday, 21 July 2017



धमाकेदार पारी से ऑस्‍ट्रेलिया को धोने वाली हरमनप्रीत कौर का जानिए सहवाग कनेक्‍शन

हरमनप्रीत कौर खेल के मैदान में टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग को अपना आदर्श मानती हैं
हरमनप्रीत कौर ने ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में नाबाद 171 रन बनाए.(फाइल फोटो)

खास बातें
     ☞कौर ने नाबाद 112 गेदों में 117 रन बनाए
     ☞भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्‍ट्रेलिया को हराया
     ☞23 तारीख को फाइनल में इंग्‍लैंड से मुकाबला

हरमनप्रीत कौर की 112 गेदों में 171 रनों की विस्‍फोटक पारी की बदौलत भारतीय टीम ने छह बार की विजेता ऑस्‍ट्रेलिया को हराकर आईसीसी महिला वर्ल्‍ड कप के फाइनल में प्रवेश किया है. अब 23 जुलाई को फाइनल में भारत का मुकाबला ऑस्‍ट्रेलिया से होगा. ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ हरमनप्रीत ने 12 चौके और दो छक्के की मदद से महज 90 गेंदों में शतक ठोका. यह उनका तीसरा वनडे शतक है. इसके साथ ही यह महिला वनडे क्रिकेट में पांचवां सबसे बड़ा निजी स्‍कोर भी है.

वीरू को मानती हैं आदर्श
हरमनप्रीत कौर खेल के मैदान में टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग को अपना आदर्श मानती हैं. वह वीरू के 'बॉल देखो, हिट करो' के फॉर्मूले को यकीन करने में यकीन करती हैं. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ फिफ्टी पूरी होने के बाद अगली 26 गेंदों में बिजली की गति से उन्‍होंने सैकड़ा जड़ा. उसके बाद के 71 रनों के लिए महज 25 गेंद खर्च कीं.


फिल्‍मों और कार की शौकीन
पंजाब के मोगा जिले में आठ मार्च, 1989 को हरमनप्रीत कौर का जन्‍म हुआ. उनको क्रिकेट के अलावा फिल्‍में देखने और कार चलाने का शौक है. बॉलीवुड फिल्‍म दिलवाले दुल्‍हनियां ले जाएंगे उनकी पसंदीदा फिल्‍मों में शुमार है.

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क्रिकेट
28 वर्षीया हरमनप्रीत ने 2009 में पहला वनडे खेला. 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप मैच में अपना पहला शतक जड़कर उन्होंने महिला क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी. इसके अलावा वह बिग बैश लीग की सिडनी थंडर्स टीम का हिस्‍सा हैं. सिडनी थंडर्स के साथ जुड़ने वाली वह पहली भारतीय क्रिकेटर हैं. इसके अलावा हरमनप्रीत सरे स्टार्स से जुड़ने वाली भी पहली भारतीय बनीं.

जब मिली कप्‍तानी
पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए भारत ने टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी. उस मैच में अहम पारी खेलते हुए हरमनप्रीत ने 31 गेंदों पर 46 रन जड़े थे. 2016 में ही हरमनप्रीत कौर को मिताली राज की जगह भारतीय टी20 टीम की बागडोर सौंप दी गई.

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